वाइफ के गहने बेचे, गैराज में काम शुरू किया, आज हैं 2,200 करोड़ के मालिक

0
727
moneyshri
moneyshri

मणि ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत येलो पेजेस कंपनी- यूनाइटेड डाटाबेस इंडिया (यूडीआई) में बतौर सेल्समैन की। यहीं काम करते हुए कंपनी ने एक बिजनेस प्लान बनाया, जिसमें सारी जानकारी टेलिफोन पर उपलब्ध रहे। मणि ने इस बिजनेस प्लान को बखूबी समझा और अपना सौ फीसदी दिया। इन्हीं दो सालों में मणि ने आंत्रप्रेन्योर बनने का फैसला किया। इसी अनुभव के बलबूते पर 1989 में उन्होंने आस्कमी कंपनी स्थापित की।

मणि का ज्यादातर बचपन कोलकाता में बीता। बचपन से ही वे बहुत साधारण थे। हां, लेकिन जो वे सोच लेते थे, उसे पूरा करके ही दम लेते थे। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स और चार्टेड अकाउंटेट की डिग्री लेने के बारे में सोचा, मगर आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही पढ़ाई-लिखाई छोड़नी पड़ी।

जस्ट डायल का आइडिया 22 साल की उम्र से ही उनके जेहन में था, जब वे यूनाइटेड डाटाबेस इंडिया कंपनी के येलो पेजेस के लिए काम करते थे। इसी के चलते वे 1989 में ‘आस्क मी’ नाम से एक कंपनी शुरू की, लेकिन तब चूंकि कनेक्शन ज्यादा नहीं थे, इसलिए बात नहीं बन सकी।

आस्कमी की विफलता के बाद मणि ने वेडिंग प्लानर के बारे में सोचा। करीब 50 हजार रुपए की इन्वेस्टमेंट के साथ काम शुरू किया और उन्हें 2-3 लाख का प्रॉफिट आने लगा। सब ठीक था, लेकिन मणि के मन को सुकून नहीं मिल रहा था। वे खुद को इस बिजनेस मॉडल से जोड़ने में विफल थे। उन्होंने शादी की प्लानिंग करनी छोड़ी और जस्टडायल के बारे में सोचने लगे। आज भी जब शादियों का सीजन होता है तो वे एक खास कैम्पेन लॉन्च करते हैं, जिसमें अलग-अलग जगहों पर शॉपिंग स्पॉट्स के बारे में जानकारी मिलती है। जेमैटो के साथ मिलकर कंपनी ने फूड कूपन बांटे थे। कुछ शहरों में ऑनलाइन फूड ऑर्डर सर्विस और टिकट बुकिंग सुविधा भी शुरू की।

मणि ने एक इंटरव्यू में बताया कि मुंबई में एक बार उनकी नजर 888 8888 नंबर पर गई। यह नंबर मुंबई के कांदिवली एक्सचेंज का था। यह एक्सचेंज 888 की विशेष सीरीज लॉन्च कर रहा था। उस वक्त तब जस्टडायल का बिजनेस प्लान तैयार हो चुका था। वे उस एक्सचेंज के जनरल मैनेजर से मिले और उन्हें अपना बिजनेस प्लान बताया। यह भी बताया कि इस विशेष नंबर के साथ वे क्या कुछ करना चाहते हैं।

मणि ने अपने ट्रेडिशनल नजरिए का इस्तेमाल जस्टडायल में किया। उन्होंने इंटरनेट पर कम से कम निर्भर करने का प्लान बनाया। इसीलिए जब 2000 में डॉटकॉम बस्ट हुआ तो कई इंटरनेट बेस्ड कंपनियों को नुकसान हुआ। मगर जस्टडायल पर कोई असर नहीं आया। 2007 में जस्टडायलका वेब-बेस्ड वर्जन लॉन्च हुआ था।

जो गलतियां मणि ने आस्कमी में की, उन्हें जस्टडायल में नहीं दोहराया। इसीलिए जस्टडायल का पहला ऑफिस बहुत बड़ा न होकर, 300 स्क्वेयर फीट में था। ऑफिस का सारा सामान रेंट पर लिया था, इसमें कुर्सी, टेबल, कम्प्यूटर और लैन नेटवर्क केबल आदि शामिल थे। इतना ही नहीं, जस्टडायल के साथ मणि ने छोटे कस्टमरों पर फोकस करना शुरू किया और पैसे एडवांस में लिए। इससे कंपनी में कैश-फ्लो की समस्या कम हुई।

मणि का जन्म तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके परिवार में पिछले 100 सालों में कोई आंत्रप्रेन्योर नहीं है। मणि ने 1989 में आस्कमी कंपनी स्थापित की, लेकिन पहले ही दो सालों में पैसों की तंगी के कारण कंपनी लॉस में जाने लगी। चूंकि वे अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे, इसलिए उन्हें पैसे कमाने के लिए जल्द ही कुछ बड़ा करने के बारे में सोचा। उन्होंने 1996 में जस्टडायल शुरू किया।

कहते हैं किसी के आगे बढ़ने के पीछे एक औरत का हाथ होता है और मणि को भी सफलता हासिल करने की प्रेरणा वाइफ अनिता से मिली है। मणि ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शादी के वक्त अनिता को टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जब उसने स्मार्टफोन खरीदा तो वे उस पर एक जानकार की तरह उगलियां चलाती थीं। इसी को देखकर मणि के मन में ख्याल आया कि क्यों न कुछ ऐसा काम शुरू किया जाए जो हर आदमी के काम आए। उनकी वाइफ अनिता स्क्रिप्ट राइटर हैं, जो फिल्मों के लिए लिखती हैं और वक्त मिलने पर वे भी वाइफ के साथ लिखने बैठ जाते हैं। कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर से लेकर इन्वेस्टर तक अमिताभ बच्चन हैं।

  • अपने आइडिया को लेकर जुनूनी रहें। इसके संबंध में सारे फैक्ट्स इकट्ठे करें। रिसर्च वर्क पूरा होना चाहिए।
  • पैसे जरूरी हैं, लेकिन किसी काम को शुरू करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपए होना जरूरी नहीं है। अच्छे आइडिया, टेक्नोलॉजी और क्रिएटिविटी के साथ भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
  • बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए उसमें लगातार सुधार लेकर आना जरूरी है। प्रोसेस, टेक्नोलॉजी, मेथेडोलॉजी, प्रोडक्ट, एडमिनिस्ट्रेशन में सुधार लेकर आना चाहिए।
  • केवल अच्छा आइडिया ही जरूरी नहीं है। आइडिया तभी सफल होगा, जब उस पर काम करेंगे। इसलिए अपने आइडिया पर एक्शन जरूर लें।
  • समय के साथ जो बदलाव आ रहे हैं, उन्हें अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहें। अगर एक स्ट्रैटजी विफल साबित हो रही है तो उसे छोड़कर आगे बढ़ जाएं।
  • अच्छी कोर टीम का होने और उनके आत्मविश्वास को मजबूत बनाना जरूरी है।